संधारणीय विकास

 

एनएलसी इंडिया, लिग्नाइट खनन एवं विद्युत उत्पादन करने वाली भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से एक है। 1956 में स्थापित इस कंपनी का परिचालन देश भर में फैल रहा है। देश को समर्पित अपने समूचे 58 वर्षों की सेवा में भूरे कोयले का उत्पादन करने वाली यह कम्पनी वर्ष दर वर्ष लिग्नाइट खनन एवं ऊर्जा उत्पादन में अपनी उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए अग्रणी एवं पथ प्रदर्शक के रूप में स्थापित हुआ है। बदलते व्यापार की प्रवृत्तियों के साथ चलते हुए एनएलसी इंडिया ने देश तथा विदेश में नवीकरणीय ऊर्जा तथा कोयला खनन व्यापार में विविधीकरण किया है। एनएलसी इंडिया ने स्थापना के समय से पर्यावरण सुरक्षा तथा संधारणीय विकास के प्रति अपने समर्पण को अपने निगमित उद्देश्य में प्रमुख स्थान देकर शामिल किया है। एनएलसी इंडिया पर्यावरण सुरक्षा तथा समुदाय एवं ग्रामीण विकास हेतु संधारणीय विकास परियोजनाओं तथा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए कंपनी का संधारणीय विकास सुनिश्चित करता है, इसी प्रकार व्यापक स्तर पर देश का संधारणीय विकास सुनिश्चित करने में योगदान करता है। एनएलसी इंडिया लिमिटेड, नेयवेली एक नवरत्न कंपनी है। जिसका विश्वास है कि “समुदाय कोई अन्य संस्था नहीं बल्कि अपने स्वंय के अस्तित्व का अभिन्न अंग है।”

एक सफल हरित कार्यावली

एनएलसी इंडिया अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में केवल लाभ में ही विश्वास नहीं करता बल्कि व्यक्तियों, धरती एवं लाभ को एकीकृत करने की नीति का अनुसरण करता है। निगमित संधारणीय दृष्टि कंपनी की सफलता तथा विभिन्न हिस्सेदारों के कुशलक्षेम हेतु समाज,पर्यावरण एवं अर्थव्यवस्था को समाहित करती है। संधारणीयता पर इसकी संकल्पना एक अधिक हरित एवं स्वस्थ ग्रह हेतु योगदान देना तथा इसे भावी पीढ़ियों को सौंपना है।

एनएलसी इंडिया अपनी सभी गतिविधियों में संघटित प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ संधारणीय विकास पर पैनी नज़र रखता है। एनएलसी इंडिया की रणनीति पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालते हुए तथा विविध हितधारकों की आकांक्षाओं को पूर्ण करने की है। प्रमुख्य क्षेत्रों में खानों में पर्यावरण पुन: स्थापन, बड़े पैमाने पर वनीकरण कार्यक्रम, वर्षाजल संचयन, अपशिष्ट उपयोग, जैव-विविधता संरक्षण, प्रभावी जल एवं ऊर्जा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने जैसे पर्यावरण सुधार कार्यक्रम सम्मिलित हैं। कर्मचारियों को पर्यावरण प्रबंधन में प्रशिक्षित करने में एनएलसी इंडिया मुख्य रूप से सक्रिय है।

कंपनी सुरक्षा, गुणवत्ता, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ खनन तकनीक, उत्सर्जन नियंत्रण तथा पर्यावरण प्रबंधन में उचित मानकों का भी अनुकरण कर रहा है।

संधारणीयता के फलसफे पर एनएलसी इंडिया के आगामी कार्यान्वयन में एनएलसी इंडिया केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) के संधारणीय विकास पर सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) के दिशानिर्देशों पर उनके द्वारा निर्धारित की गई वैधानिक आवश्यकता की भी पूर्ति करता है।

एनएलसी इंडिया की अपनी खुद की संधारणीय विकास नीति है: एनएलसी इंडिया ने मुख्य व्यावसायिक गतिविधि के परिमाण एवं प्रकृति पर विचार करते हुए तथा हितधारकों की आकांक्षाओं को पूर्ण करते हुए तथा पर्यावरण की सुरक्षा करते हुए अपनी खुद की संधारणीय विकास नीति तैयार की है। एनएलसी इंडिया पर्यावरणीय मुद्दों हेतु वर्ष दर वर्ष कई नई पहलें करता रहा है।

वित्तीय वर्ष 2013-2014 के दौरान, संधारणीय विकास के अधीन एनएलसी इंडिया ने निम्नलिखित परियोजनाएं पूर्ण की हैं।

पारिस्थितिकी: खानों में भू-उद्धार एवं पुन:उपयोग।

मिट्टी का उत्खनन लिग्नाइट की निकासी हेतु पूर्वापेक्षित है। लिग्नाइट के खनन के लिए विशेष खनन उपकरणों का उपयोग किया जाता है। खनन संचालन के कारणवश प्रतिवर्ष कई हेक्टेयर भूमि हटाई जाती है। परियोजना निर्माण के चरण में ही, एनएलसी इंडिया ने भूमि उत्पादकता का अनुरक्षण करने तथा मिट्टी कटाव, जल प्रदूषण इत्यादि जैसे प्रदूषणों के नियंत्रण के लिए खनन पश्चात क्षेत्र के पुनर्भरण एवं भू-उद्धार की योजना बना ली है। भू-उद्धार की अवधारणा को एनएलसी इंडिया में उच्च महत्ता दी जाती है। एनएलसी इंडिया खनन किए जा चुके क्षेत्रों में तथा अधिभार गड्ढों का भू-उद्धार कर रहा है। पृष्ठभरण क्षेत्रों की भू-उद्धार हेतु तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस), एक नवीन प्रक्रिया का विकास किया गया है। खान कटावों के प्रारंभिक उद्घाटन के दौरान निर्मित बाह्य ओवरडंपों को वनस्पति में परिवर्तित करते हुए निवास हेतु उपयुक्त बनाया जा रहा है। एनएलसी इंडिया ने अधिभार गड्ढों के वनीकरण के लिए खानों के ढलान स्थिरीकरण नामक एक परियोजना की कार्यवाही करते हुए तकनीकें भी विकसित की हैं। प्रति वर्ष लगभग 100 हेक्टेयर की खनन हो चुकी भूमि को वनीकरण, कृषि तथा बागवानी फसलों के लिए पुन:प्राप्त किया जाता है। विभिन्न प्रकारों के फलदार वृक्षों को रोपते हुए एक बाग विकसित किया गया है तथा एनएलसी इंडिया के आयुर्वेदिक औषधालय तथा जनता की जरूरतों को भी पूरा करने के लिए पुन:प्राप्त क्षेत्र में जड़ी-बूटियों की खेती भी की जाती है। इस पुन:प्राप्त भूमि की पैदावार प्राकृतिक एवं सामान्य कृषि भूमियों की पैदावार जितनी ही अच्छी है।

इस वर्ष नेयवेली के एनएलसी इंडिया में सभी तीन संचालित खानों की खनन हो चुकी भूमि के लगभग 110 हेक्टेयर के भू-उद्धार करने की योजना थी तथा करीब 112.85 हेक्टेयर की भूमि की भू-उद्धार हो चुका है।

महिलाओं के लिए संधारणीय विकास पर प्रशिक्षण कार्यक्रम:

यह परियोजना महिलाओं को संधारणीय विकास पर शिक्षित करती है तथा पर्यावरण, पर्यावरणीय सुरक्षा, समस्याओं का सामना करने की क्षमता तथा संधारणीय दृष्टिकोण की महत्वता पर जोर देने की सूचना के प्रचार-प्रसार का लक्ष्य रखती है। इस परियोजना का मुख्य संदेश महिला कर्मचारियों तथा उनके द्वारा उनके परिवारों के अन्य सदस्यों तथा समाज को इस क्षेत्र के एक हरित पथ विशेषज्ञ संकाय को प्रवृत्त करते हुए प्रभावी रूप से स्थानांतरित किया जाता है।

महिला कर्मचारियों को हरित गृह, शून्य अपशिष्ट, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण, ग्रीन हाउस प्रभाव की अवधारणा तथा वैश्विक तपन कम करने के लिए आवश्यक प्रयासों, हरे खाद्य पदार्थ, जैविक खेती, कीट खाद के बारे में सिखाया गया, जहाँ उन्होंने कचरा जमा करने तथा खाद बनाने, ध्वनि प्रदूषण के बारे में तथा पर्यावरण सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा सांस्कृतिक मूल्यों तथा विरासत की ओर नागरिक के सामाजिक दायित्व के बारे में सीखा। विशेषज्ञ परामर्शदाता की सेवाओं के उपयोग के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। अब तक एनएलसी इंडिया की लगभग 80 महिला कर्मचारी, कार्यपालक एवं गैर-कार्यपालक इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं।

 

 एनएलसी इंडिया लिमिटेड