एनएलसी में विद्युत उत्पादन

 

ताप विद्युत गृह -I:

600 मे.वा. का नेयवेली ताप विद्युत गृह-I जिसमें प्रथम एकक का समकलन मई 1962 तथा अंतिम एकक का समकलन सितंबर 1970 में किया गया था, जिसमें 50 मे.वा. प्रत्येक की छ इकाइयां तथा 100 मे.वा. प्रत्येक की तीन इकाइयां समाहित हैं। एनएलसी की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के पश्चात, ताप विद्युत गृह-I से उत्पादित विद्युत टेण्‍जेडको, तमिलनाडु को दी जाती है जो कि एकमात्र लाभार्थी है। उपकरणों/उच्च दबाव के हिस्सों की उम्र बढ़ने के कारणवश मार्च 1992 में भारत सरकार द्वारा जीवन विस्तार कार्यक्रम अनुमोदित किया गया था जिसका सफलतापूर्वक समापन मार्च 1999 में हुआ जिससे जीवन में 15 साल का विस्तार हुआ। इस क्षेत्र में उच्च ग्रिड की माँग को ध्यान में रखते हुए इस विद्युत गृह का संचालन अवशिष्ट जीवन आकलन (आरएलए) अध्ययन आयोजित करने के पश्चात् किया जा रहा है।

 

ताप विद्युत गृह-II:

1470 मे.वा. के द्वितीय ताप विद्युत गृह में 210 मे.वा. प्रत्येक की 7 इकाइयां समाहित हैं। फरवरी 1978 में भारत सरकार ने 630 मे.वा. क्षमता (3x210 मे.वा.) के द्वितीय ताप विद्युत गृह तथा फरवरी 1983 में अतिरिक्त 210 मे.वा. प्रत्येक की चार इकाइयों के साथ 630 मे.वा. से 1470 मे.वा. के द्वितीय ताप विद्युत गृह विस्तार को स्वीकृति दी। पहली 210 मे.वा. इकाई का समकलन मार्च 1986 तथा अंतिम इकाई (एकक-VII) का समकलन जून 1993 में किया गया। द्वितीय खान की आवश्यकताओं को पूर्ती करने के पश्चात् द्वितीय ताप विद्युत गृह से उत्पन्न ऊर्जा दक्षिणीय राज्यों क्रमश: तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश एवं पोंडिचेरी के संघ शासित क्षेत्र द्वारा साझा की जाती हैं।

 

ताप विद्युत गृह-I विस्तार:

ताप विद्युत गृह-I का विस्तार खान-I विस्तार से उपलब्ध लिग्नाइट का उपयोग कर किया गया है। योजना की स्वीकृति भारत सरकार द्वारा फरवरी 1996 में की गई थी। एकक-I का समकलन अक्तूबर 2002 तथा एकक-II का जुलाई 2003 में किया गया था। आंतरिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के पश्चात् इस ताप विद्युत गृह से उत्पन्न ऊर्जा दक्षिणीय राज्यों क्रमश: तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक एवं पोंडिचेरी के संघ शासित क्षेत्र द्वारा साझा की जाती हैं।

 

बरसिंहसर ताप विद्युत गृह:

भारत सरकार ने अक्तूबर 2004 में बरसिंहसर ताप विद्युत गृह 250 मे.वा. (2x125 मे.वा.) को स्वीकृति दी। दोनों एककों को दिसंबर 2011 तथा जनवरी 2012 में प्रारंभ किया गया। आंतरिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के पश्चात् इस ताप विद्युत गृह से उत्पन्न ऊर्जा राजस्थान राज्य के डिस्कॉम्स द्वारा साझा की जाती है।

 
 

ताप विद्युत गृह-II विस्तार:

इस परियोजना में 250 मे.वा. प्रत्येक क्षमता के दो एकक समाहित हैं। एकक-II ने अप्रैल 2015 तथा एकक-I ने जुलाई 2015 में वाणिज्यिक संचालन प्राप्त किया। लिग्नाइट आवश्यकता की पूर्ति खान-II विस्तार द्वारा की जाती है। इस परियोजना के भाप जेनरेटर पर्यावरण अनुकूलीय “सर्कुलेटिंग फ्लुइडाइज़्ड बेड कंबश्च्न (सीबीएफसी)” तकनीक का प्रयोग करते हैं। इस तकनीक को भारत मे पहली बार 250 मे.वा. क्षमता के एककों के लिए अपनाया है।